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बिहार में किशोर अपराध में 131% की बढ़ोतरी, मोबाइल छिनतई से लेकर साइबर ठगी तक बढ़ा खतरनाक ट्रेंड

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बिहार में किशोर अपराध तेजी से बढ़ रहा है। मोबाइल छिनतई, बाइक चोरी, साइबर ठगी और गैंगवार जैसी घटनाओं में नाबालिगों की संलिप्तता बढ़ी है। चार साल में 131% की वृद्धि दर्ज हुई है, जिससे कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

पटना/आलम की खबर: बिहार में किशोर अपराध अब सिर्फ कुछ छिटपुट घटनाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक गंभीर सामाजिक और कानून-व्यवस्था संकट का रूप ले चुका है। राजधानी पटना सहित राज्य के कई जिलों में नाबालिगों के गैंग तेजी से सक्रिय होते जा रहे हैं, जो मोबाइल छिनतई, बाइक चोरी, साइबर ठगी, नशे के अवैध कारोबार और यहां तक कि आपसी गैंगवार जैसी संगीन घटनाओं में लगातार शामिल पाए जा रहे हैं। पुलिस और प्रशासन के लिए यह स्थिति इसलिए भी चिंताजनक बनती जा रही है क्योंकि अपराध की यह नई पीढ़ी बेहद कम उम्र में ही संगठित अपराध की दुनिया में कदम रख रही है।

पिछले कुछ वर्षों में बिहार के शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में किशोर अपराधों के पैटर्न में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। खासकर कोचिंग हब, हॉस्टल और लॉज वाले क्षेत्रों में 16 से 18 वर्ष आयु वर्ग के किशोरों की आपराधिक गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं। पहले जहां चोरी या छोटी-मोटी झपटमारी जैसे मामले सामने आते थे, वहीं अब ये नाबालिग साइबर ठगी और ड्रग नेटवर्क जैसे गंभीर अपराधों में भी शामिल हो रहे हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार कई गैंग ऐसे हैं जो सोशल मीडिया के जरिए नए सदस्यों को जोड़ते हैं और उन्हें जल्दी पैसा कमाने का लालच देकर अपराध की दुनिया में धकेल देते हैं।

आंकड़े इस पूरे संकट की भयावहता को और स्पष्ट करते हैं। बीते चार वर्षों में बिहार में जुवेनाइल क्राइम में 131 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2021 में जहां करीब 2,180 मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2024 तक यह संख्या बढ़कर 5,037 तक पहुंच गई। 2025 में यह आंकड़ा 5,400 से अधिक हो चुका है, जो यह दर्शाता है कि हर दिन औसतन 13 से ज्यादा नाबालिग किसी न किसी आपराधिक मामले में पुलिस के रडार पर आ रहे हैं। यह स्थिति केवल कानून-व्यवस्था की चुनौती नहीं बल्कि सामाजिक संरचना पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट के अनुसार किशोरों द्वारा किए गए गंभीर अपराधों में बिहार देश के शीर्ष राज्यों में शामिल हो गया है। विशेष रूप से हत्या के प्रयास जैसे गंभीर मामलों में बिहार की हिस्सेदारी चिंताजनक रूप से अधिक है। रिपोर्ट बताती है कि देशभर में किशोरों द्वारा हत्या के प्रयास के 2,004 मामले दर्ज हुए, जिनमें से अकेले बिहार में 673 मामले सामने आए। यह आंकड़ा बताता है कि अपराध की गंभीरता केवल बढ़ ही नहीं रही, बल्कि उसका स्वरूप भी अधिक हिंसक होता जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बढ़ते किशोर अपराध के पीछे कई सामाजिक और मनोवैज्ञानिक कारण हैं। सोशल मीडिया पर गैंगस्टर लाइफस्टाइल का प्रभाव, जल्दी पैसा कमाने की चाह, बेरोजगारी, पारिवारिक निगरानी की कमी और नशे की लत इस समस्या को और गंभीर बना रही है। कई किशोर अपराध को एक “स्टाइल” और “स्टेटस” के रूप में देखने लगे हैं, जिससे वे आसानी से गैंग के प्रभाव में आ जाते हैं। अपराध की दुनिया में शामिल होने के बाद इनका निकलना और भी मुश्किल हो जाता है।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि चोरी और मोबाइल छिनतई जैसे मामलों में करीब 38 प्रतिशत, गैंग विवाद और मारपीट में 19 प्रतिशत, नशे के कारोबार में 17 प्रतिशत और साइबर फ्रॉड में लगभग 14 प्रतिशत किशोरों की संलिप्तता पाई गई है। यह आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि नाबालिग अब केवल सहायक भूमिका में नहीं हैं, बल्कि कई मामलों में अपराध के मुख्य संचालक के रूप में सामने आ रहे हैं।

राज्य में लगातार बढ़ रहे इस ट्रेंड ने पुलिस और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। कई जिलों में विशेष किशोर इकाइयों को सक्रिय किया गया है और स्कूल-कॉलेज स्तर पर जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद अपराध के मामलों में अपेक्षित कमी नहीं दिख रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक परिवार, शिक्षा प्रणाली और समाज मिलकर इस दिशा में गंभीर प्रयास नहीं करेंगे, तब तक इस समस्या पर पूरी तरह नियंत्रण पाना मुश्किल होगा।

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